Breaking News


लक्षण-

पेचिश को आम भाषा  में आंव पढ़ना भी कहा जाता है कहीं-कहीं सुदूर देहाती क्षेत्रों में इसे मल पढ़ना भी कहा जाता है ।यह रोग भी अनियमित खानपान तथा अधिक तली हुई चीजों खाने से होता है इस रोग में पेट में मरोड़ , पेट में दर्द होकर झांक दार पखाना होता है । कभी-कभी थोड़ा, कभी ज्यादा पखाना होता है। पखाना के साथ कभी-कभी न्यूनाधिक मात्रा में रक्त भी आ सकता है। बार बार शौच जाने की इच्छा होती है लेकिन हर बार पकाना नहीं होता है।

उपचार -


  1. 250 मिली लीटर दूध में आधा चम्मच सोंठ का चूर्ण उबालकर 3 से 4 दिन तक सोते समय पिएं।
  2. आम की गुठली का चूर्ण एक चम्मच ठंडे जल से सेवन करें।
  3. आम के पत्तों को छाया में सुखाकर महीन पीसकर रख लें दिन में तीन बार 6-6 ग्राम चूर्ण गर्म पानी के साथ ले।
  4. दो केले आधा पाव दही के साथ खाएं।
  5. लगभग 12 ग्राम इसबगोल पानी के साथ खीर की तरह मिश्री डालकर पकाएं। प्रतिदिन इसका ताजा ताजा सेवन करें।
  6. 6 ग्राम प्याज 125 मिलीलीटर पानी में पकाकर थोड़ा गुड़ मिलाकर पी जाएं।
  7. नीम का पानी उबालकर एक चम्मच सुबह-शाम लें।
  8. पीसी मिश्री और पिसी धनिया प्रत्येक 10 ग्राम लेकर एक कप पानी में मिला लें। इसी का सेवन नित्य करें।
  9. 250 ग्राम सौंफ ले। इसमें से आधी सौंफ भून कर पीस लें।फिर दोनों सौंफ तथा संभाग मिश्री मिलाकर अच्छी तरह कूट पीसकर कपड़े में छानकर के रख लें। इसमें से 10 -12 ग्राम मात्रा पानी के साथ तीन से चार बार रोज सेवन करें।
  10. जामुन की गुठली और आम की गुठली का चूर्ण संभाग मिलाकर एक चम्मच चूर्ण दिन में 2 बार सेवन करें।
  11. जामुन की छाल का ताजा रस दिन में तीन से चार बार सेवन करें।
  12. छोटी हरड, आम की गुठली, जामुन की गुठली सब को भूनकर समान मात्रा में लेकर कूट पीसकर कपड़े में छान लें। इसमें से एक दो चम्मच सुबह शाम सेवन करें। पुराना से पुराना पेचिश भी ठीक हो जाता है।
  13. दही और थोड़ा सा प्याज का रस मिलाकर सेवन करें।
  14. कैथा की पके फल का गूदा,मधु, जीरा और इलायची का चूर्ण-सब को एक साथ मिलाकर सुबह दोपहर शाम तीनों वक्त सेवन करें।
  15. उबले हुए अरवा चावल को सामान्य ठंडा करके उसमें चावल की आधी मात्रा भर दही सान लें। उसमें दही के आठवें हिस्से भर भुने हुए जीरे के बारीक चूर्ण के साथ पिसे हुए काले नमक और सफेद नमक को स्वाद अनुसार मात्रा में मिला लें।इस मिश्रण को दिन भर में 3 से 4 बार थोड़ा-थोड़ा करके चबा चबा कर खाएं।

दावा रहित उपचार -


  • पेट पर गीली मिट्टी की पट्टी बांधे।
  • सुबह जागने के पश्चात रोज 2 लीटर तक पानी पी जाएं।
  • सुबह और शाम नित्य टहलने की आदत डालें।

सावधानी एवं बचाव -


  • खानपान संयमित रखें।
  • सुपाच्य भोजन करें। मसालेदार और तैलीय भोजन का त्याग कर दे।

अगर आपको यह पोस्ट उपयोगी लगी हो तो इसे अपने दोस्तो के साथ शेयर करे यदि आपका कोई प्रश्न या सुझाव है तो कमेंट बॉक्स में कमेंट करे ' धन्यवाद '

सभी प्रकार के बीमारियों मै खाए जा सकते है ये सुपरफूड जानने के लिए क्लिक करे ।


Tags

कोई टिप्पणी नहीं