आग से जलना
आग से जलना कोई रोग ना होकर एक आकस्मिक दुर्घटना है ।लेकिन इस पर शुरू में ध्यान नहीं दिया जाए तो विभिन्न प्रकार से शरीर प्रभावित होकर शरीर में विकृति आ जाती है। यहां तक कि कभी-कभी मृत्यु तक हो जाती है। जलने के कारण कुछ भी हो सकता है।जैसे -प्रत्यक्ष रूप से आग पकड़ लेती है,या गर्म चीज का शरीर अंग विशेष शे स्पर्श हो जाता है,आदि। कभी-कभी बिजली का तार छू जाने से भी अंग विशेष जल जाता है। साथ ही शरीर का अत्यधिक निर्जलीकरण हो जाता है। जले हुए स्थान पर छाले फफोले या काले दाग पद जाते है जो असावधानी के कारण बाद में भयंकर घाव बन जाते हैं। गंभीर रूप से जलने पर कभी-कभी मृत्यु भी हो जाती है।
उपचार -
- नारियल का तेल 50 ग्राम गर्म लेकर,12 ग्राम कपूर पीसकर मिला लें। यह तेल ठंडा करके दिन में 4 से 5 बार जगह स्थान पर लगाएं।
- नारियल का तेल और चूने का पानी दोनों को अच्छी तरह फेट कर प्रभावित जगहों पर लगाएं। जले हुए स्थान पर लगाने के लिए यह बहुत ही अच्छा मिश्रण है।
- सरसों का तेल 50 ग्राम, 12 ग्राम खाने वाला सोडा और कपूर का तेल 3 ग्राम सबको अच्छी तरह आपस में मिला दें। 4 से 5 दिन तक रात में लगाएं।
- काले या सफेद तिल को पीसकर लगाएं।
- तुलसी की पत्तियों को पानी के साथ पीसकर जले हुए स्थान पर थोड़ी थोड़ी देर के अंतराल पर लगाते रहे।
- थोड़ा सा जो आग में जला कर रख लें इसी राख को तिल के तेल में मिलाकर लगाएं बर्गद की कोंपोली को दही में पीसकर लेप करें।
- काली मसूर की दाल को तवे पर जलाकर कोयला बना ले। फिर इसको महीन पीसकर चूर्ण तैयार कर ले। इस चूर्ण को नारियल के तेल में मिलाकर जले हुए स्थान पर लगाएं।
- गुलाब जल में गोपी चंदन मिलाकर लेप करें।
- आम की गुठली पानी में घिसकर प्रभावित जगह पर लेप करें।
- साबुत मूंग पानी में पीसकर जले हुए स्थान पर लेप करें।
- पके हुए बेल का गूदा जले स्थान पर लगाएं। जले स्थान पर बहुत फायदा करता है।
- मेथी के दानों को पानी में पीसकर लगाएं।
- गेहूं के आटे को पानी में घोलकर लगाएं।
- कच्चा आलू पीसकर लगाएं।
- बगैर दूध की चाय ठंडा करके लगाएं।
- अलसी के तेल को जले हुई स्थान पर लगाएं घाव ठीक हो जाएगा और जले हुए का निधन भी खत्म हो जाएगा।
दवा रहित उपचार -
- जलने के तुरंत बाद जलन से बचाव के लिए अंग विशेष को गेहूं के आटे में दबा लें। जलन नहीं होगी।
- जलने पर तुरंत अंग विशेष को पानी में डालें । फफोले नहीं पड़ेंगे।
- जले स्थान पर मुल्तानी मिट्टी का लेप करें।
सावधानी एवं बचाव
- जले स्थान की नियमित सफाई रखें।
- जलने के बाद फफोले ना पड़े, इसके लिए जले स्थान पर शहद का लेप कर दें।
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